Monday, 22 June 2020

छोटे भाई के पास आया था फोन, रातभर किसी को नहीं बताया, सुबह 4 बजे दौड़ने चला गया, 7 बजे भाभी को रिकॉर्डिंग सुनाई https://ift.tt/317Fe8I

16 जून को रात साढ़े नौ बजे मेरे पास फोन आया। फोन पर किसी ने मेरा नाम पूछा। फिर पूछा कि दीपक आपके क्या लगते हैं? मैंने कहा, भाई है मेरा। फिर उन्होंने कहा कि, वो अब इस दुनिया में नहीं रहे।

गलवान में शहीद हुए दीपक सिंह के छोटे भाई आशीष सिंह ने बताया कि, इस बात पर मुझे बिल्कुल यकीन नहीं हुआ क्योंकि दीपक भैया की मजाक करने की आदत थी और वो अक्सर ऐसे मजाक करते रहते थे। इसलिए आशीष ने फोन काट दिया और पांच मिनट बाद उसी नंबर पर फिर कॉल किया। वहां से बोल रहे शख्स ने कहा कि, हम मजाक नहीं कर रहे। आपके भाई शहीद हो गए हैं। फिर आशीष ने उनके पिता का नाम, एड्रेस, यूनिट का नाम पूछा तो उन्होंने वही जानकारी दी जो दीपक भैया की थी।

अपने भाइयों-बहनों के साथ शहीद दीपक कुमार। इनके बड़े भाई भी सेना में हैं।

इतना सुनते ही आशीष एक पल के लिए अवाक रह गए। घर में पापा और दादी भी थे। वे खाना खा चुके थे और सोने जा रहे थे। आशीष ने उन्हें कुछ नहीं बताया और घर के बाहर सड़क किनारे जाकर बैठ गए। उन्होंने शहीद दीपक कुमार के सबसे खास दोस्त सचिन सिंह बघेल को बुलाया। आशीष ने बताया कि, हमारे परिवार के कई लड़के आर्मी में हैं। हमारे गांव के भी बहुत लड़के हैं। इसलिए मैंने उन लोगों को फोन पर ये बात बताई। उन्होंने जिस नंबर से फोन आया था, वो नंबर मांगा। फिर बात करके बताया कि 'भाई खबर सही है। हमारा भाई शहीद हो गया।'

दीपक कुमार अपनी यूनिट में भी हंसी-मजाक के लिए जाने जाते थे। वो सबको हंसाते रहते थे।

आशीष कहते हैं, मैं रातभर सोया नहीं और घर के बाहर ही बैठा रहा। फिर सुबह के 4 बज गए तो दौड़ने चला गया। मेरा दिमाग इस बात का यकीन करने को तैयार ही नहीं था कि, दीपक भैया शहीद हो गए। जब सब लोगों ने कन्फर्म कर दिया, तब फिर सुबह 7 बजे मैंने बड़ी भाभी को बताया कि, यूनिट से फोन आया था। उन्होंने बताया कि दीपक भैया नहीं रहे। इतना सुनते ही भाभी रोने लगीं। उन्हें यकीन नहीं हुआ। मैंने कॉल की रिकॉर्डिंग की थी। फिरउन्हें वो रिकॉर्डिंग सुनाई तब वो मानीं। उन्हें रोता देख पापा और दादी भी समझ गए और धीरे-धीरे सबको पता चलगया।

दीपक कुमार की शादी 30 नवंबर 2019 को ही हुई थी। शादी के बाद वो कुछ दिनों तक घर पर रुके थे, फिर ड्यटी पर लौट गए थे।

दीपक भैया की शादी 30 नवंबर को ही हुई थी। भाभी मायके में थीं। मैंने उन्हें शाम को फोन पर बताया। उनकी हालत बहुत खराब हो गई थी क्योंकि वो तो इस आसमें थीं कि अगले महीने भैया घर आने वाले थे। शादी के बाद भैया, भाभी से सिर्फ दो बार ही मिल पाए थे। वो अगले महीने आने वाले थे।

दीपक के चचेर भाई साजन सिंह भी आर्मी में हैं और इन दिनों चंडीगढ़ में पोस्टेड हैं। उन्होंने बताया कि, दीपक सूडान जाने वाला था। उसका फॉरेन ड्यूटी वाली लिस्ट में नाम आया था। वो सूडान जाने को लेकर उत्साहित भी था। साजन के मुताबिक, दीपक की मां उसके बचपन में ही गुजर गईं थीं। इसके बाद दादी ने ही उसकी परवरिश की थी। वो आर्मी में जाने के लिए 5 से 6 बार भर्ती में जा चुका था। उसके पास सिर्फ 5 माह बचे थे, उसके बाद वो भर्ती मेंनहीं जा पाता और उसी आखिरी ट्राय में उसने भर्ती निकाल ली थी।

भाइयों-बहनों को यकीन नहीं हो रहा कि महज 8 माह पहले दूल्हा बना उनका भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा।

बकौल साजन, मैंने दीपक को कहा था कि भाई तू शादी के बाद ज्यादा गांव में रुका नहीं। अब चले जा घर। तो उसने कहा था कि थोड़े दिन में सूडान जाना है। उस वक्त घर आना होगा। तभी आऊंगा। लेकिन किस को पता था कि दीपक इस दुनिया से हमेशा के लिए दूर जाने वाला है।

काफी कोशिशों के बाद दीपक का सेना में सिलेक्शन हुआ था। उनका सेना में जाने का जुनून इतना था कि उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

22 जून को दीपक के परिजन अस्थि विसर्जन के लिए ग्राम फरेदा (रीवा) से इलाहाबाद के लिए निकले। परिवार के साथ ही गांव के दो सौ से ज्यादा लोग अपने निजी वाहनों से अस्थि विजर्सन के लिए निकले हैं। शहीद दीपक सिंह का अंतिम संस्कार 18 जून को उनके गांव फरेदा में ही किया गया था।

अपने वीर सपूत की अंतिम यात्रा में पूरा गांव आखिरी दर्शन के लिए उमड़ पड़ा।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Ladakh Galwan Valley Martyr Deepak Singh From Madhya Pradesh Rewa Updates; Shaheed Brother Speaks To Dainik Bhaskar


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3dmSYyZ

Labels:

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home